प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का आयोजन कक्षा-सत्रों, दौरों, शैक्षिक भ्रमण तथा विशेषीकृत मॉड्यूलों की श्रंखला के माध्य्म से किया जाता है। इसके साथ ही, समय-समय पर विशिष्ट विषयों पर कार्य भी आवंटित किए जाते हैं। इन सभी गतिविधियों में परिवीक्षार्थियों की उपस्थिति अनिवार्य है।
व्याख्यान सत्र मुख्य रूप से ज्ञान के व्यवस्थित हस्तांतरण के लिए हैं। परिवीक्षार्थियों को सदैव सतर्क रहने और प्रशिक्षण / सीखने की प्रक्रिया में संलग्न रहने की सलाह दी जाती है।
अकादमी में शैक्षणिक गतिविधियों को दो सत्रों – भोजन से पूर्व एवं पश्यात के सत्रों में बांटा गया है जिनमें क्रमशः छह और दो व्याख्यान सत्र आयोजित होते हैं। सामान्यत: दोपहर के भोजन के बाद के सत्र व्यावहारिक अभ्यासों के लिए आरक्षित रहते हैं।
अध्ययन दौरे प्रशिक्षण का एक अभिन्न अंग हैं और इन्हें इस प्रकार आयोजित किया जाता है जिससे परिवीक्षार्थी भारत के विभिन्न राज्यों में वानिकी अभ्यास के विभिन्न रूपों को जान एवं समझ सकें। यह उन्हें वन अधिकारियों के रूप में अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के दायरे को समझने में सक्षम बनाता है।
कक्षा प्रशिक्षण को पूर्णता देने के उद्देश्य से शनिवार या किसी अन्य दिन फील्ड भ्रमण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इन कार्यक्रमों से परिवीक्षार्थियों को क्षेत्र की स्थितियों से परिचित होने तथा प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में आवश्यक विभिन्न तकनीकों / कौशलों को आत्मसात करने का अवसर प्राप्त होता है।
इसमें मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु तथा केरल राज्य शामिल हैं।
इसमें ओडिशा, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, मेघालय, भूटान तथा अंडमान एवं निकोबार द्वीप-समूह शामिल हैं।
गैलरी देखेंपरिवीक्षार्थियों को वन-पारितंत्र से परिचित कराने के उद्देश्य से चकराता का दौरा।
वन्य उपजों के उपचार और सीमांत निवासियों के सामाजिक-आर्थिक विकास के बारे में बताते हुए उचित योजनाएँ बनाना
गैलरी देखेंविभिन्न तकनीकी और सामाजिक-आर्थिक विकास पर वर्तमान प्रास्थिति से अवगत कराने के लिए, विशेष व्याख्यान देने हेतु प्रख्यात व्यक्तियों को आमंत्रित किया जाता है। विभिन्न महत्वपूर्ण मामलों पर इन अतिथि गणमान्य व्यक्तियों के साथ वार्ता के माध्यम से परिवीक्षार्थियों को अपनी समझ विकसित करने में सहायता मिलती है।
परिवीक्षार्थियों को नामित संकाय सदस्य से संपर्क करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है जिसे "काउंसलर" या “परामर्शक” कहा जाता है। यह परिवीक्षार्थी के लिए एक मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है तथा आधिकारिक एवं व्यक्तिगत मामलों में सहायता और मार्गदर्शन प्रदान करता है। परिवीक्षार्थियों को परामर्शकों के साथ निकट संपर्क में रहने और अपने संबंधित परामर्शक से अनौपचारिक रूप से आवश्यकतानुसार मिलने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। परामर्शक समूह की बैठकों को पाठ्यक्रम निदेशक या संबंधित परामर्शकों द्वारा समय-समय पर आवश्यकतानुसार आयोजित किया जाता है। परामर्शक की भूमिका इस प्रकार है :-
(1) परिवीक्षार्थियों को उनके पेशे और प्रशिक्षण से जुड़े मामलों पर सलाह देना।
(2) उन्हें प्रशिक्षण अवधि के दौरान अलग-अलग तरह के मामलों का सामना करने में सक्षम बनाना।
(3) उनमें आत्मविश्वास, स्वाभिमान और नेतृत्व गुणों का विकास करना।
(4) सक्षमता पर पेशेवर रूप से अनुकरणीय प्रदर्शन हेतु उन्हें सलाह देना।
परिवीक्षार्थियों को लगातार होने वाली परामर्शक समूह बैठकों के माध्यतम से संकाय सदस्यों से वार्ता के अवसर प्रदान किए जाते हैं।