ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत्।
तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्यस्विद्धनम्॥
"यह समस्त चराचर जगत ईश्वर से व्याप्त है। इसलिए प्रकृति की देन का आनंद त्याग, कृतज्ञता और संयम के भाव से लें; किसी अन्य के धन (संपत्ति) का लालच न करें।"
- ईश उपनिषद
'वन अनुसंधान संस्थान परिसर’ के ऐतिहासिक और प्रशांत क्षेत्र में स्थित इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय वन अकादमी, भारत में गर्व के साथ वानिकी प्रशिक्षण का नेतृत्व कर रही है। यह प्रमुख संस्थान दशकों से देश की प्राकृतिक विरासत के संरक्षकों को तैयार करने और भारतीय वन सेवा के शीर्ष नेतृत्व को तराशने के पवित्र राष्ट्रीय दायित्व का निर्वहन करता आ रहा है।
वानिकी का बदलता स्वरूप
प्राचीन काल से ही भारतीय दर्शन प्रकृति को दोहन की वस्तु नहीं, अपितु सम्मान करने योग्य एक जीवित परितंत्र के रूप में देखता आया है। अथर्ववेद में हमें बहुत सुंदर ढंग से स्मरण कराया गया है:
माता भूमिः पुत्रो अहं पृथिव्याः।
"यह पृथ्वी हमारी माता है और मैं इसका पुत्र हूँ"
21वीं सदी में भी यह पुरानी समझ वर्तमान की अहम चुनौतियों से जुड़ती है। आज, वानिकी केवल पारंपरिक पेड़-पौधे उगाने और काष्ठ-प्रबंधन तक ही सीमित नहीं है। हमारे अधिकारी वैश्विक जलवायु परिवर्तन में कमी लाने, जैव-विविधता संरक्षण, जल की सुरक्षा तथा समाज व पर्यावरण के बीच सौहार्द स्थापित करने हेतु अग्रिम पंक्ति में कर्मशील हैं। आज के वन अधिकारी को पर्यावरण की सुरक्षा की सख्त माँगों तथा तेज़ी से आगे बढ़ रहे देश के समावेशी विकास की आकांक्षाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना होता है।
हमारा प्रशिक्षण अधिदेश : परंपरा और नवाचार का संगम
अपने अधिकारियों को इस जटिल परिदृश्य के लिए तैयार करने हेतु, आईजीएनएफए एक ऐसे संस्थान के रूप में कार्यरत है जहाँ वैज्ञानिक सटीकता और नैतिक शासन साथ-साथ चलते हैं। हमारा क्षमता-निर्माण ढांचा इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि वह हमें जीवन पर्यन्त सीखने के लिए तैयार करता है।
- आरंभिक प्रशिक्षण : हमारे युवा प्रशिक्षु अधिकारियों में प्रशासनिक कुशलता, कानूनी समझ और वनों पर निर्भर समुदायों के प्रति गहरी सहानुभूति पैदा करना।
- कौशल उन्नयन : राज्य वन सेवा के अधिकारियों को 'अखिल भारतीय सेवाओं' की राष्ट्रीय कार्य-संस्कृति और मूल्यों से परिचित कराना।
- मिड-करियर प्रशिक्षण तथा वरिष्ठ वानिक कार्यशालाएँ : सेवारत वरिष्ठ अधिकारियों के लिए एक ऐसा मंच प्रदान करना जहाँ वे रुककर एक-दूसरे से सीख सकें और तेज़ी से बदलते वैश्विक तौर-तरीकों के अनुसार खुद को ढाल सकें।
अपने पाठ्यक्रमों में अत्याधुनिक तकनीकों, जैसे जियोमैटिक्स, ए.आई.-आधारित लैंडस्केप मॉनिटरिंग, जीआईएस और रिमोट सेंसिंग का इस्तेमाल करते हुए भी हम मानवीय मूल्यों से मजबूती से जुड़े हैं। हमारा विश्वास है कि तकनीक एक शक्तिशाली साधन अवश्य है किंतु अधिकारी की दूरदर्शिता और निष्ठा ही नीति को वास्तविक विश्व में असरकारक बनाती है।
सहयोगपूर्ण वातावरण
इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय वन अकादमी की ताकत इसके जीवंत और सहयोगपूर्ण इकोसिस्टम में निहित है। यह इकोसिस्टम वन अनुसंधान संस्थान (FRI), भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) और भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) जैसे विश्व-स्तरीय सहयोगी संस्थानों के साथ हमारी करीबी साझेदारी और निकटता से समृद्ध हुआ है। अपने बेहद समर्पित संकाय सदस्यों तथा कर्मचारियों के सहयोग से, यह अकादमी में विश्व-स्तरीय अधिगम अनुभव प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
आप एक भावी अधिकारी हों, अनुभवी विशेषज्ञ हों, या संरक्षण प्रेमी नागरिक हों, मैं आपको अकादमी की वेबसाइट को देखने और हमारे उस सतत मिशन के साथ जुड़ने के लिए आमंत्रित करता हूँ, जिसे हमारी अकादमी का मार्गदर्शक आदर्श वाक्य बखूबी दर्शाता है:
अरण्यं ते पृथिवी स्योनमस्तु
"वन पृथ्वी पर प्रसन्नता और शांति का स्रोत बने।”
जय हिन्द
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद खजूरिया
निदेशक,
इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय वन अकादमी, देहरादून
पेज अद्यतन तिथि: 10-07-2026 12:43 PM


